Saturday, January 29, 2011

अब तो जागो...मेरे दोस्त.........

आपकी आवाज निकलने के पहले ही बंद कर दी जाती है. आपका अधिकार धीरे-धीरे छीना जा रहा हैं. क्या आपको नहीं मालूम? क्या कुंभकरण की नींद सो रहे हैं. आखिर कब तक सोते रहेंगे जब आप सब कुछ गंवा बैठेंगे तब, नहीं आप जागो और neta  रूपी राक्षस को पहचानों. जिसे पांच साल के लिए चुनते है. जिसको अपना हीरो मान बैठते है. वहीं है असली राक्षस जो आपका हीरो है. गांव-गांव और गली-गली घूमकर हाथ जोड़कर आप लोगों से वोट मांगते है जो आपके सामने भोला-भाला और अनाथ जैसा चेहरा दिखाते है आपको बुद्धु बना कर चले जाते है. और आपके वह हीरो हो जाते है और आप उनको अपना वोट देकर अधिकार खो बैठेते है. वो अधिकार जो सरकार की उलट-पलट कर देती है वो अधिकार यानी अपना मताधिकार.

आपको क्या बताए आपको मालूम ही होगा की हमारे देश का यूथ लालचौक पर  अपने देश की शान और जान तिरंगा फहराने जा रहे थे. उसे नहीं फहराने दिया गया. इससे बुरा दिन क्या होगा, जो अपने देश की झंडा फहराने के लिए रोक लगा  रहा है. ये कैसी आजादी जो अपना तिरंगा अपने देश में ही फहराने नहीं दिया जाता है. आजाद होते तो जरूर तिरंगा फहराने को मिलता..... आखिर कब तक चलेगा ये खेल....अब तो जोगो....
यह तो टे्रलर है पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त.

Friday, January 14, 2011

Pardeshiyon se ankhiyan na milana

परदेशियों से ना आंखियां मिलाना........ गाने की लाइन है, लेकिन कहीं न कहीं यह हमारी  लाइफ से भी जुड़ी हुई है. अक्सर देखने-सुनने में आता है कि परदेश जॉब की तलाश में गए यूथ   'इश्कÓ के खेल में पड़ जाते हैं. तब शुरू हो जाता है आंख मिचौली..............प्यार जताना..............धीरे धीरे प्यार रिश्ते में बदल जाना................तब दिल उबा तो दे दिया घोखा................उसके बाद भाग निकला......... क्या समझ रहे है आप हम कोई कविता नहीं लिख रहे हैं ये रीयल लाइफ से जुड़ एक केस है जा सामने आया है. इसे रीड कर देखिए हम क्या बताए.....रीड करिए..

 एक परदेशी ने शबनम के भरोसे को चकनाचूर कर दिया. बहुत विश्वास से उसने अपना सब कुछ परदेशी को सौंपा था पर असलियत खुलने के बाद उसके होश उड़ गए. धोखा देने वाले की तलाश में वह महीनों दिल्ली की खाक छानती रही. धोखेबाज का असली पता मालूम होने के बाद वह दो दिन पहले सिटी पहुंची.
मुलाकातशबनम दिल्ली में का रहने वाली  है. उसकी अजमेरी गेट पर दुकान है. शबनम राम रतन  पहली मुलाकात करीब दुकान पर ही हुई थी. उसने बताया था कि वह फरीदाबाद  है और यहां एक बड़े न्यूज चैनेल में रिपोटर्र है.  दो-चार मुलाकातों में ही उसने शबनम को विश्वास में लिया. इसके बाद वह उसके घर में ही पति की तरह रहने लगा.
 जमीन खरीदने के लिए दो लाख रुपये कैश लिए और बदले में उसे एक प्राइवेट बैंक का तीन लाख रुपये का चेक थमा दिया. दो दिन बाद राम रतन ने कहा कि उसकी मां की मौत हो गई है. उसने शबनम से फिर पांच हजार रुपये कैश, सोनी का कैमरा और मोबाइल फोन लिया तथा एक सप्ताह में वापस आने की बात कहकर चला गया. इसके बाद न वह लौटा न उसकी खबर आई. बैंक में चेक करने पर उसका नाम-पता फर्जी निकला. इसके बाद शबनम को अपने साथ हुए धोखे का पता चला. उसने दिल्ली के कमला मार्केट थाने में फ्रॉड का केस दर्ज कराया. राम रतन के साथ रहने के दौरान वह एक बार उसके दिल्ली में रहने वाले एक चाचा से मिली थी. संयोगवश एक दिन उनसे दोबारा मुलाकात होने के बाद शबनम को राम रतन की असलियत मालूम हुई और वह उसकी तलाश में गोरखपुर आ गई. शबनम ने थर्सडे को डीआईजी मुकेश बाबू शुक्ला से मिल कर घटना की शिकायत की.
भाई ने की मदद
वह पहले भी कई बार इस तरह के मामलों में फंस चुका है. इसी कारण शबनम को राम रतन के परिवार से पूरा सपोर्ट मिला. यहां आकर उसे मालूम हुआ कि राम रतन पहले से मैरिड है. उसके चार बच्चे हैं.
मेरा पैसा चाहिए
राम रतन की फेमिली से मिलकर शबनम का मन पूरी तरह बदल गया है. अब उसका कहना है कि  उसे केवल अपने पैसों वापस चाहिए.  वह न तो अब उससे शादी करना चाहती है और न ही साथ रहना चाहती


Thursday, January 13, 2011

Apane to apane hote hain

अपने तो अपने होते है. अगर आप 'अपने  मूवी देखी होगी तो आप जरूर इस बात को समझ जाएंगे. अपने ही लोग दुख में साथ देते हैं. छोडि़ए मूवी-ऊवी की बात आगे बताते हैं बात क्या है... एक लव बर्ड एक लव स्टोरी....

टाइटल        :  कोटा टू गोररखपुर
पात्र              : क्षितिज और आकांक्षा
सहयोगी      :  पिता, कोर्ट
मीडिया सहयोगी :  आई नेक्स्ट, गोरखपुर


      आखिर प्यार की जीत हो ही गई. लव स्टोरी कोटा टू गोरखपुर भले ही टफ रही हो लेकिन उसका क्लाइमेक्स दुखद रहा. लव मैरिज के दूसरे दिन ही कानूनी पचड़े के चलते एक लव बर्ड को जुदा होना पड़ गया था लेकिन कानूनी पहल  के बाद प्यार की जीत हो गई. कोर्ट के सामने युवती ने पति के साथ रहने की इच्छा जताई और कोर्ट ने  निर्णय उसी के पक्ष में सुना दिया.
       वेडनेसडे को आकांक्षा ने कोर्ट में  लिख कर दे दिया कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है. जिस पर कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया. कोर्ट के निर्णय के बाद क्षितिज ने अपने प्यार को दोबारा पाने की खूशी आईनेक्स्ट के साथ शेयर की. 
उनकी जिंदगी में बहुत अहम है. दोनों 22 दिसंबर वेडनेसडे को ही कोटा से जुदा हुए थे और 12 जनवरी वेडनेसडे को ही उन्हें कोर्ट ने फिर दोबारा मिलवा दिया. इतने दिन बाद दोनों की मुलाकात हुई तो दोनों के आंखों से आंसू निकल आए. कोर्ट के बाहर खड़े लोग और इस केस को जानने वाले लोगों का बस यही कहना था कि आखिर सच्चे प्यार की जीत हो ही गई.
क्षितिज के प्यार की लड़ाई में उसके पिता विश्वबंधु ने भी पूरा साथ दिया. कई दिन तक इंतजार करने के बाद क्षितिज अपनी पत्नी की तलाश में गोरखपुर आ गया था. क्षितिज के पास कोर्ट मैरिज के एवीडेंस थे. उसे लेकर वह थाने भी गया लेकिन तब उसकी किसी ने मदद नहीं की थी. उसका हौसला बढ़ाने के लिए उसके  पिता भी सिटी पहुंच गए. पहले तो उन्होंने आकांक्षा के पिता से बात की लेकिन उनके न मानने पर पुलिस की कार्रवाई तक इंतजार किया. वही लव बर्ड आईनेक्स्ट ने हमारे लिए जो पहल की उसी से सफलता मिली है. हम धन्यबाद देते है.  इसी के साथ हम लव स्टोरी एंड होती है.  

...............फिर मिलेंगे चलते चलते...........

Wednesday, January 5, 2011

ek bar phir

मां की ममता भी कुछ अजीब होती है. जो अपने बच्चे को जन्म देकर किसी कूड़े में या नाले में फेंक  देती है. बहुत ही क्रुर टाइप की महिला होगी जो मां की दर्द को नहीं जानती. ऐसी ही कई मांओं अपने बच्चों को अनजान जगह पर छोड़ जाती है. इस रिपोर्ट में पढि़ए ....................बेकिश्मती बच्ची का दर्द जिसकी मां-बाप को पता नहीं..............

सिटी में पिछले एक महीने में करीब आधा दर्जन नवजात शिशु मिले. इसमें तीन जिंदा हैं. एक नाले में नवजात की डेड बॉडी मिली.  गत्ते में बंद कर फेंका गया था, जिसकी जानकारी क्षेत्रीय लोगों ने पुलिस को दी. नाले के अंदर गत्ते में नवजात की डेड बॉडी मिली. लोगों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने डेड बॉडी को निकलवाकर उसे क्रिमेशन के लिए भेजा, लेकिन बात यहाँ खत्म नहीं होती. साल सहजनवां के अमरौरा में एक नवजात बच्ची मिली थी. ठंड में बच्ची के बॉडी का खून तक जमा गया था, लेकिन स्थानीय महिला ने बच्ची को बचाकर अपने पास रखा और पुलिस को सूचना दी. इसी तरह से चौरीचौरा के सोनबरसा में मार्शल सवार एक नवजात बच्चे को छोड़ गए थे. इसी महीने गोरखनाथ एरिया में भी मजार पर एक बच्चे को लावारिस हालत में छोड़ दिया गया. इससे पूर्व कई क्षेत्र में नवजात शिशु की डेड बॉडी पुलिस को मिली थी.

Sunday, January 2, 2011

ek thi palak

गोरखपुर में एक घटना हुई जो दिल दहला देने वाली  थी. गरीब की बेटी थी जो नाले में बह गई.  मां के मुंह से निकलने वाली शब्द 'लौटा दो मेरी बेटी को' ... यह लाइन आसपास से  गुजरने वाले सभी लोगों को दिल को चोट पहुंचाती हुई  तीर की तरह निकल गई. आखिर इस नाले के पास कौन. लेकिन इस मां पुकार किसी के पास नहीं पहुंची. ना जाने मासूम पलक के लिए मां को कितना आंसू बहाना पड़ेगा. हालांकि आसपास के लोगों को गुरुवार को रात में हुई घटना के बारे जानकारी हो गई है.
गम हो गई पलक
किसी काम से पलक को लेकर सरोज अपने मकान मालिक को फोन करने पीसीओ जा रही थी. तभी रात के अंधेरे में एक साइकिल सवार बदमाश ने उसके साथ लूट का प्रयास किया. जिसका विरोध करते समय लुटेरे ने सरोज को धक्का दे दिया, गोद से मासूम पलक छूट गई और नाले में जा गिरी. लोगों ने थाने में इसकी सूचना दी. मासूम पलक की तलाश के लिए पुलिस ने कुछ लोगों को नाले में उतारा. लेकिन पलक नहीं मिली.
पुलिस कहती है सिर्फ लूट
एक महीने पहले की अंधियारी बाग के दक्षिण एरिया के किराए के मकान में संतोष और उसकी फैमिली रहने आए थे. वहीं दूसरी ओर पुलिस ने अपने एफआईआर में सिर्फ लूट की बात ही दर्ज की है. हालांकि पुलिस ने मासूम को सर्च करने के लिए रात और सुबह में सिर्फ कुछ घंटे की मशक्कत की. उधर, निगम का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. आखिर पलक मां की आँखों से दूर चली गई और सारा सिस्टम धरा की धरा रह गई. माँ की आंसू को रोकने के लिए पलक ही नहीं...............